22 अप्रैल, 2012

उसे क्या कहें

मखमली दुर्वा को गलीचा समझ 
की अटखेलियाँ किरणों से 
फिर भी गहरी उदासी से 
मुक्ति ना मिल पाई 
निहारता दूर क्षितिज में
नेत्र बंद से होने लगते 
 खो जाता दिवा स्वप्न में 
सत्य से बहुत दूर 
नहीं चाहता कोई कुछ कहे 
है वह क्या ?आइना दिखाए 
कठिनाइयों से भेट कराए 
भूले से यदि हो सामना 
निगाहें चुराए मिलना ना चाहे
या फिर आक्रामक रुख अपनाए 
कैसे  बीता कल भूल गया 
ना ही चाहता जाने 
होगा क्या कल 
प्रत्यक्ष से भी दूर भागता 
ऐसे ही जीना वह चाहता 
उसे क्या कहें |
आशा