28 जनवरी, 2015

संपदा



बंजर भूमि
वनस्पति के बिना 
दुखी है प्रजा !

स्वप्न में आये 
हरियाये पल्लव 
मन हर्षाये ! 

वनसंपदा 
मूल्यवान जब हो 
देश सफल !

रंग बिरंगी 
है फूलों की टोकरी 
उपवन में ! 

जड़ें जमाये 
वनस्पति देश की 
पश्चिम में भी !

जलसंपदा 
बहुत मूल्यवान 
सबके लिए ! 

पहचान है 
हरीतिमा हमारी
सबसे न्यारी !

पीत वासना
सुमुखी हरीतिमा 
मन को छूती ! 

आशा