26 फ़रवरी, 2014

सुबह हुई ही नहीं


आँखें क्यूं खोली जाएं
जब धूप खिली ही नहीं
उठने की बात कहाँ से आई
जब सुबह हुई ही नहीं  |

प्यार के भ्रम में न रहना
लगती है यह एक साजिश
प्यार आखिर हो कैसे
जब दिल की दिल से राह नहीं |

संभावना अवश्य दीखती
कहीं आग लगने की
जले हुए दिल से धुंआ निकलने की
वैसे तो सुबह हुई ही नहीं
आशा