23 अगस्त, 2011

जब आँख खुली


उस दिन जब आँख खुली
प्रथम किरण सूरज की
जैसे ही चेहर पर पड़ी
दमकने लगा 
वह  और अधिक |
आँखें झुकी वह शरमाई
उसे देख कर सकुचाई
खोजी नजर जब उधर गयी
प्यार भरे नयनों से देखा
धीमें  से वह मुस्काई |
जो संकेत नयनों से मिले
मन की भाषा पढ़ पाया
पहले प्यार की पहली सुबह
और उष्मा उसकी
अपने मन मैं सजा पाया |

आशा

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बढ़िया।

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    कल 24/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. कोमल भावो से सजी सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  3. बहुत कोमल भावों को सहेजा है ..सुन्दर रचना

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  4. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! फूलों की पांखुरी सी कोमल और सुरभित ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  5. पहला प्यार पता चल जाए तो इससे अच्छा क्या ... बहुत लाजवाब ...

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  6. बहुत सुन्दर प्यार का चित्रण |
    सुन्दर रचना |

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  7. शब्द शब्द ....रस में डूबा ....प्यार भरी रचना

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  8. एक रचना , कोमल भावों से सजी .... बधाई ...

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  9. बहुत ही प्यारी और खुबसूरत रचना ..

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